UPTET News: चार साल बाद आयोजित हो रही यूपी-टीईटी 2026 परीक्षा इस बार नियमों की वजह से विवादों में आ गई है। आयोग की तरफ से जारी विज्ञापन में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनसे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सीधे आवेदन से बाहर हो गए हैं। सबसे ज्यादा असर डीएलएड के शुरुआती सेमेस्टर में पढ़ रहे छात्रों पर पड़ा है, जो अब फॉर्म नहीं भर पाएंगे। वहीं बीएड को लेकर भी साफ स्थिति न होने से अभ्यर्थियों के बीच कन्फ्यूजन बना हुआ है। ऐसे में लाखों छात्र परेशान हैं और लगातार नियमों में बदलाव की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यह परीक्षा उनके करियर से सीधे जुड़ी हुई है।
अंतिम वर्ष की शर्त से बढ़ी दिक्कत
इस बार आयोग ने साफ कर दिया है कि प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए केवल वही अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं, जो दो वर्षीय डीएलएड (बीटीसी) के अंतिम वर्ष में हैं या फिर कोर्स पूरा कर चुके हैं। इसी तरह डीएड और विशेष शिक्षा से जुड़े कोर्स के अंतिम वर्ष के छात्रों को भी ही योग्य माना गया है। इससे पहले या दूसरे सेमेस्टर में पढ़ रहे छात्रों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। यही कारण है कि हजारों नहीं बल्कि लाखों अभ्यर्थियों को झटका लगा है, क्योंकि वे अभी शुरुआती चरण में ही अपनी ट्रेनिंग कर रहे हैं और उन्हें मौका नहीं दिया गया।
एनसीटीई के नियम से अलग फैसला
यह पूरा मामला इसलिए और ज्यादा चर्चा में है क्योंकि एनसीटीई के नियम इससे अलग हैं। 4 अगस्त 2022 को जारी निर्देश में साफ कहा गया था कि कोई भी अभ्यर्थी जैसे ही किसी शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स में दाखिला लेता है, वह टीईटी परीक्षा में शामिल हो सकता है। इसमें डीएलएड, बीएड और डीएड जैसे सभी कोर्स शामिल हैं। यानी पहले से लेकर आखिरी सेमेस्टर तक के छात्र आवेदन के योग्य माने गए थे। लेकिन इस बार आयोग ने केवल अंतिम वर्ष वाले छात्रों को ही मौका दिया है, जिससे दोनों के नियमों में अंतर साफ दिखाई दे रहा है और इसी वजह से विवाद बढ़ रहा है।
लाखों छात्रों पर सीधा असर
इस फैसले का सबसे बड़ा असर डीएलएड के पहले और दूसरे सेमेस्टर में पढ़ रहे करीब तीन लाख अभ्यर्थियों पर पड़ा है। ये सभी छात्र इस बार यूपी-टीईटी 2026 का फॉर्म नहीं भर पाएंगे। अगर इसमें बीएड, डीएड और अन्य कोर्स के शुरुआती सेमेस्टर के छात्रों को भी जोड़ दिया जाए तो यह संख्या और ज्यादा बढ़ सकती है। कई छात्र लंबे समय से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब नियमों की वजह से उन्हें इंतजार करना पड़ेगा, जिससे उनके एक साल का नुकसान भी हो सकता है।
बीएड को लेकर बना कन्फ्यूजन
उच्च प्राथमिक स्तर के लिए बीएड को शामिल जरूर किया गया है, लेकिन यहां भी वही शर्त रखी गई है कि केवल अंतिम वर्ष में पढ़ रहे या पास अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकते हैं। इससे बीएड के पहले और दूसरे सेमेस्टर में पढ़ रहे छात्रों के बीच भी कन्फ्यूजन की स्थिति बन गई है। कई अभ्यर्थी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि वे आवेदन के योग्य हैं या नहीं, क्योंकि नियमों को लेकर साफ जानकारी नहीं मिल पा रही है और अलग-अलग तरह की बातें सामने आ रही हैं।
आगे क्या होगा इस पर नजर
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है और सोशल मीडिया से लेकर अन्य माध्यमों पर आवाज उठाई जा रही है। छात्र चाहते हैं कि नियमों में बदलाव किया जाए ताकि सभी सेमेस्टर के अभ्यर्थियों को मौका मिल सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में छात्र इस बार यूपी-टीईटी 2026 से बाहर रह जाएंगे। अब सबकी नजर आयोग के अगले फैसले पर टिकी है कि क्या इसमें कोई सुधार किया जाएगा या फिर यही नियम लागू रहेंगे।








